आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक प्रतीक दीर्घा
प्रत्येक प्रतीक वैदिक अंकशास्त्र, ग्रहीय शक्तियों, पवित्र ज्यामिति (Sacred Geometry) और वास्तु ऊर्जा संतुलन के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित दिव्य कृति है।
सूर्य (अंक 1) की शक्ति, आत्मविश्वास, तेजस्विता एवं सर्वोच्च नेतृत्व क्षमता का दिव्य प्रतीक। केंद्रीय बिंदु से 12 आदित्य किरणों का स्वर्णिम विस्तार।
1 से 9 अंकों और नवग्रहों की परस्पर कॉस्मिक एकता व संपूर्ण ब्रह्मांडीय संतुलन। 9 संकेंद्रित वलयों में समाहित ग्रहों का दिव्य ऊर्जा मानचित्र।
अंक 8 (शनि) का अनंत कर्म चक्र, न्याय, तपस्या एवं आध्यात्मिक समृद्धि। लेम्निस्केट (∞) वक्र जो समय, कर्म और स्थायी संपदा का प्रतीक है।
3×3 जादुई वर्ग जिसकी प्रत्येक पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 15 आता है। भवन और जीवन में वास्तु ऊर्जा और पंचतत्वों का संपूर्ण संतुलन।
गुरु का दैवीय ज्ञान, बुध की तीक्ष्ण बुद्धि और केतु का गुप्त अंतर्ज्ञान—तीनों का त्रिकोणीय आध्यात्मिक संरेखण और अंतर्ज्ञान विकास।
1.618 स्वर्णिम अनुपात—प्रकृति, डीएनए, आकाशगंगाओं और शंख में अंतर्निहित प्राकृतिक वृद्धि एवं समृद्धि का ब्रह्मांडीय स्पाइरल।
भावनात्मक शांति, सच्चा प्रेम, दांपत्य सामंजस्य एवं कलात्मक सौंदर्य के दो दिव्य प्रकाश स्तंभ। चंद्र की सौम्यता और शुक्र का सम्मोहन।
इच्छाशक्ति (सूर्य) एवं अंतर्ज्ञान (चंद्र) का अलौकिक संतुलन। पिंगला और इड़ा नाड़ी का सुषुम्ना में मिलन कराकर आंतरिक शांति प्रदान करने वाला प्रतीक।
पंचतत्व संतुलन, वाकपटुता, व्यापारिक सफलता एवं स्थिरता का केंद्र। पन्ना रत्न की हरी आभा से आलोकित 5 तत्वों का दिव्य सुरक्षा कवच।
उत्तर-पूर्व दिशा, गुरु (Jupiter) का वास एवं दिव्य ज्ञान प्रवाह। वास्तु शास्त्र का सर्वाधिक ऊर्जावान केंद्र जहाँ से कॉस्मिक शक्तियां प्रवाहित होती हैं।